विजयवाड़ा, 13 अगस्त 2026: आंध्र प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को लेकर राज्यभर में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। उम्मीदवारों और विपक्षी दलों ने भर्ती में अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाया है। इस विवाद ने शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे और CBI जांच की मांग को तेज़ कर दिया है। विवाद की पृष्ठभूमि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने 2024 में 6,100 शिक्षकों की पुरानी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी थी। इसके बाद अप्रैल 2025 में 16,347 पदों के लिए अधिसूचना जारी हुई, जिसमें 3.36 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया। जून-जुलाई 2025 में परीक्षा के बाद 15,941 पदों पर नियुक्तियाँ की गईं। भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठे और 350 से अधिक मामले अदालतों में दर्ज हुए। आरोपित अनियमितताएँ प्रश्नपत्र लीक और पारदर्शिता की कमी। स्पोर्ट्स कोटा नियुक्तियों में गड़बड़ी। योग्य उम्मीदवारों को अवसर न मिलना। भर्ती प्रक्रिया में SCERT निदेशक को जिम्मेदारी देना, जबकि परंपरागत रूप से DSC convener परीक्षा आयोजित करता था। आरोप है कि प्रश्नपत्र तैयार करने और अपलोड करने का काम आउटसोर्स कर्मचारियों को दिया गया, जिनमें से एक ने खुद परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल किया। विरोध प्रदर्शन YSR कांग्रेस पार्टी ने राज्यभर में बंद और रैलियाँ आयोजित कीं। विजयवाड़ा, नेल्लोर, तिरुपति और नांद्याल में छात्रों और युवाओं ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया। पुलिस ने कई जगहों पर रैलियाँ रोकीं, जिससे तनावपूर्ण हालात बने। YSRCP नेताओं ने इसे Gen Z आंदोलन करार दिया। राजनीतिक असर YSRCP ने शिक्षा मंत्री नारा लोकेश के इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं रखी और युवाओं के साथ अन्याय किया। यह विवाद राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है और आने वाले चुनावों पर असर डाल सकता है। आंध्र प्रदेश में शिक्षक भर्ती विवाद केवल रोजगार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पारदर्शिता, युवाओं की नाराज़गी और राजनीतिक जवाबदेही का प्रतीक बन गया है। भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों ने राज्यभर में असंतोष पैदा किया है और यह आंदोलन अब एक बड़े राजनीतिक संकट का रूप ले रहा है।