नई दिल्ली, 14 अगस्त 2026:

भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित डेटा सेंटरों का विस्तार आने वाले वर्षों में बिजली ग्रिड पर भारी दबाव डाल सकता है। मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2031-32 तक इन डेटा सेंटरों से 26.3 गीगावॉट अतिरिक्त लोड जुड़ जाएगा।

मुख्य चिंता

इतनी बड़ी बिजली मांग से ग्रिड स्थिरता प्रभावित हो सकती है।

मंत्रालय ने कहा है कि यदि समय रहते ऊर्जा प्रबंधन और नवीकरणीय स्रोतों का उपयोग नहीं बढ़ाया गया तो बिजली आपूर्ति में असंतुलन पैदा हो सकता है।

वैश्विक संदर्भ

अमेरिका और यूरोप में भी AI डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग ने बिजली ग्रिड पर दबाव डाला है।

भारत में यह चुनौती और बड़ी है क्योंकि यहां बिजली वितरण प्रणाली पहले से ही कई क्षेत्रों में कमजोर है।

विशेषज्ञों की राय

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को स्मार्ट ग्रिड तकनीक और स्टोरेज समाधान पर तुरंत निवेश करना होगा।

साथ ही, नवीकरणीय ऊर्जा को डेटा सेंटरों से जोड़ने की रणनीति अपनानी होगी।

AI डेटा सेंटरों का विस्तार भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ ही बिजली ग्रिड की स्थिरता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। यदि समय रहते कोर्स करेक्शन नहीं किया गया तो आने वाले दशक में ऊर्जा संकट गहरा सकता है।