दरभंगा: दरभंगा राज म्यूजियम में संरक्षित हाथीदांत और काष्ठ निर्मित दुर्लभ पुरावशेषों पर संकट गहराता जा रहा है। इनटैक (INTACH) बिहार इकाई ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की अपील की है, ताकि इन अमूल्य कलावस्तुओं का संरक्षण शीघ्र पूरा हो सके।

संकट की जड़

महाराजा रमेश्वर सिंह (1900–1929) ने मुर्शिदाबाद के कलाकारों से हाथीदांत की अद्वितीय कलाकृतियां बनवाई थीं।

इनमें महिषासुरमर्दिनी की प्रतिमा, हाथी का हौदा, पालकी, राजसिंहासन, पलंग, सोफा, कुर्सियां, मेज और आभूषण बॉक्स जैसी वस्तुएं शामिल हैं।

समय के साथ ये कलाकृतियां क्षरण का शिकार हो रही हैं और संरक्षण कार्य अधूरा है।

अधूरा संरक्षण

वर्ष 2019 में एनआरएलसी (लखनऊ) और संग्रहालय प्रशासन के बीच 155 पुरावशेषों के संरक्षण का समझौता हुआ था।

बिहार सरकार ने 1.65 करोड़ रुपये स्वीकृत किए, जिनमें से ₹82.50 लाख एडवांस दिए गए।

तीन वर्ष में कार्य पूरा होना था, लेकिन 2026 तक भी मुख्य कलाकृतियों का संरक्षण अधूरा है।

शिकायत और महत्व

पूर्व संग्रहालयाध्यक्ष डॉ. शिव कुमार मिश्र ने पीएमओ पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर अधिकारियों की लापरवाही का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि यह संग्रह भारत ही नहीं, विश्व स्तर पर भी अद्वितीय है और तत्काल संरक्षण जरूरी है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर नष्ट हो सकती है।