बिहार में आज से छात्रों का महाआंदोलन शुरू हो गया है। झारखंड में हाल ही में हुए छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद अब बिहार के छात्र भी भर्ती और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। यह आंदोलन राज्य की सम्राट चौधरी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

आंदोलन की पृष्ठभूमि

लंबे समय से विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी तथा अनियमितताओं को लेकर छात्रों में नाराज़गी है।

कई परीक्षाओं की तिथियां बार‑बार टलने और परिणामों में पारदर्शिता की कमी ने युवाओं को आंदोलित कर दिया है।

झारखंड में हुए छात्र आंदोलन से प्रेरित होकर बिहार के छात्र संगठनों ने भी राज्यव्यापी विरोध का ऐलान किया।

छात्रों की मांगें

भर्ती और परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए।

लंबित नियुक्तियों को शीघ्र पूरा किया जाए।

परीक्षा तिथियों और परिणामों की घोषणा समय पर हो।

भ्रष्टाचार और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए।

आंदोलन का स्वरूप

पटना, दरभंगा, गया, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे प्रमुख शहरों में छात्रों ने रैलियाँ और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

सोशल मीडिया पर भी #BiharStudentMovement और #ExamJustice जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

छात्र संगठनों ने इसे “युवा अधिकार आंदोलन” का नाम दिया है।

राजनीतिक असर

विपक्षी दलों ने छात्रों के आंदोलन को समर्थन दिया है और सरकार पर भर्ती प्रक्रिया में लापरवाही का आरोप लगाया है।

सम्राट चौधरी सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वह जल्द ठोस कदम उठाए, अन्यथा यह आंदोलन राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।