नई दिल्ली, 16 अगस्त 2026: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर तीखा पलटवार किया है। पीएम ने हाल ही में विपक्षी नेताओं को "दिमागी नक्सल" कहकर निशाना साधा था।

चिदंबरम का बयान

चिदंबरम ने कहा कि उन्हें "दिमागी नक्सल" कहलाने पर गर्व है।

उन्होंने तर्क दिया कि यह शब्द उनके विचारों की स्वतंत्रता और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने की क्षमता को दर्शाता है।

उनके अनुसार, लोकतंत्र में असहमति और आलोचना को दबाना खतरनाक है।

राजनीतिक संदर्भ

प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा था कि कुछ नेता "दिमागी नक्सलवाद" फैलाते हैं।

इस बयान के बाद कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया।

चिदंबरम का जवाब इस बहस को और तेज कर सकता है।

संभावित असर

यह बयान संसद और राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म देगा।

विपक्ष इसे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे से जोड़कर सरकार पर दबाव बना सकता है।

वहीं, सत्तारूढ़ दल इसे विपक्ष की "विचारधारा की कमजोरी" बताकर पलटवार कर सकता है।

पी. चिदंबरम का यह बयान केवल व्यक्तिगत प्रतिक्रिया नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक विमर्श और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

"दिमागी नक्सल" शब्द अब राजनीतिक बहस का नया केंद्र बन गया है।